रात का शिकवा कि दिन जाने को था
मेरी दहलीज पार कर
मुट्ठी भर सितारे चुरा कर ले गया
दिन का शिकवा कि रात जाने को थी
मेरी दहलीज पार कर के
मुट्ठी भर किरणें चुरा कर ले गयी
होंठ चांदी के कटोरे थे
मिसरी का एक टुकडा घोल कर --
फिर रात मुस्कराई
और दिन हँस दिया
सितारा कोई कम नहीं
किरणें पूरी की पूरी थी
भेड़ों की चोरी .
चरवाहों की चोरी
बंदूकों की चोरी
सिपाहियों की चोरी
यह कैसी चोरियाँ हैं दोस्तों .
यह इल्जाम कैसे हैं !
और राजनीति के हाथ में
यह जाम कैसे हैं !
जो दुनिया का आँगन सजाये
उस हुस्न की चोरी करो !
जो अदब के कायदे सिखाये
उस इश्क की चोरी करो !
जो जीने की रस्म चलाए
उस इल्म कि चोरी करो !
जो इंसान की किस्मत लिखे
उस कलम की चोरी करो !
दिल की दहलीज पार कर
बाहों को खोल कर
उस दौलत को चुराओ !
होंठ चांदी के कटोरे हैं
मिसरी का टुकडा घोल कर
कोई तोहमत लगाओ
यह सभी दौलते हैं
अगर चोरी करो
तो सब चोरियाँ मुबारक !
अगर तोहमत लगाओ
तो सब तोहमते प्यारी हैं !
अमृता प्रीतम
Thursday, October 29, 2009
सब चोरियाँ मुबारक !
Labels:
अमृता प्रीतम amrita preetam ..
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
अमृता जी के बारे में जितना लिखा जाए मेरे ख्याल से उतना कम है , जैसा कि मैंने अपने पहले लेख में लिखा था कि मैंने इनके लिखे को जितनी बार पढ़ा है उतनी बार ही उसको नए अंदाज़ और नए तेवर में पाया है .।उनके बारे में जहाँ भी लिखा गया मैंने वह तलाश करके पढ़ा है ।एक बार किसी ने इमरोज़ से पूछा कि आप जानते थे कि अमृता जी साहिर से दिली लगाव रखती हैं और फ़िर साजिद पर भी स्नेह रखती है आपको यह कैसा लगता है ?
इस पर इमरोज़ जोर से हँसे और बोले कि एक बार अमृता ने..(Read Full..)
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
एक मुलाकात
मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी
सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने
क्या ख्याल आया
उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी
मेरे हाथों में थमाई
और हंस कर कुछ दूर हो गया
हैरान थी….
पर उसका चमत्कार ले लिया
पता था कि इस प्रकार की घटना
कभी सदियों में होती है…..
लाखों ख्याल आये
माथे में झिलमिलाये (Read full..)




13 comments:
जो दुनिया का आँगन सजाये
उस हुस्न की चोरी करो !
जो अदब के कायदे सिखाये
उस इश्क की चोरी करो !
जो जीने की रस्म चलाए
उस इल्म कि चोरी करो !
जो इंसान की किस्मत लिखे
उस कलम की चोरी करो !
हमें इंसानियत का सबक यहीं से लेना चाहिए।
अगर चोरी करो
तो सब चोरियाँ मुबारक !
अगर तोहमत लगाओ
तो सब तोहमते प्यारी हैं !
yeh panktiyan dil ko chhoo gayin....
इस तरह की सन्देश अमृता जी ही लेखनी से ही निकल सकती है इंसानियत से प्रेम ही सबसे बडा धर्म है ..........एक सुन्दर और बहुमुल्य कृति पढवाने के लिये धन्यावाद!
वाह अमृता प्रीतम जी को पढ़कर दिल खुश हो जाता है.
इसमें भी उन्होंने क्या खूब लिखा है.
होंठ चांदी के कटोरे हैं
मिसरी का टुकडा घोल कर
कोई तोहमत लगाओ
यह सभी दौलते हैं
अगर चोरी करो
तो सब चोरियाँ मुबारक !
अगर तोहमत लगाओ
तो सब तोहमते प्यारी हैं !
नतमस्तक हूं.
रामराम.
amrita ji ka likha to har shabd ek nayab moti ki tarah hai..........shukriya.
जो अदब के कायदे सिखाये
उस इश्क की चोरी करो !
जो जीने की रस्म चलाए
उस इल्म कि चोरी करो !
जो इंसान की किस्मत लिखे
उस कलम की चोरी करो !
शायद ये पंक्तियाँ किसी को सही राह दिखा पाएं....
अनमोल!!
बहुत बहुत शुक्रिया,इस ख़ूबसूरत कविता को पढ़वाने के लिए...अमृता जी कि हर कविता ही संग्रहनीय है
होंठ चांदी के कटोरे हैं
मिसरी का टुकडा घोल कर
कोई तोहमत लगाओ
यह सभी दौलते हैं
अगर चोरी करो
तो सब चोरियाँ मुबारक !
अगर तोहमत लगाओ
तो सब तोहमते प्यारी हैं !
behtreen kavita lagayi apne Amrita ji ki...
आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।
हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।
अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।
शुभेच्छू
चच्चा टिप्पू सिंह
आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।
हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।
अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।
शुभेच्छू
चच्चा टिप्पू सिंह
आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।
हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।
अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।
शुभेच्छू
चच्चा टिप्पू सिंह
बहुत ही सुन्दर एवं लाजवाब रचना, आपका आभार इसे प्रस्तुत करने के लिये ।
Post a Comment