Wednesday, December 22, 2010
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एक मुलाकात मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने क्या ख्याल आया उस...
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अमृता जी के जन्मदिन पर इमरान खान जी की तरफ से इमरोज़ के संग की गयी एक ख़ास मुलाकात .जो उन्होंने कल हमें अमृता जी के जन्मदिन पर इस ब्लॉग ...
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अमृता जी के बारे में जितना लिखा जाए मेरे ख्याल से उतना कम है , जैसा कि मैंने अपने पहले लेख में लिखा था कि मैंने इनके लिखे को जितनी बार पढ़ा...
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तुम्हारे ग़म की डली उठा कर जुबान पर रख ली है देखो मैंने वह कतरा - कतरा पिघल रही है मैं कतरा कतरा ही जी रहा हूँ गुल...
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अमृता और साहिर में जो एक तार था वह बरसों तक जुडा रहा ,लेकिन क्या बात रही दोनों को एक साथ रहना नसीब नहीं हो सका ?यह सवाल अक्सर मन को कुदेरता ...
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सोचती हूँ-खुद के तखै़युल से, अपने देश से, अपने देश के लोगो से, और तमाम दुनिया के लोगों से-यानी खुदा की तखलीक से मेरी मुहब्बत का गुनाह सचम...
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मिट्टी के इस चूल्हे में से हम कोई चिनगारी ढूँढ़ लेंगे एक-दो फूँफें मार लेंगे बुझती लकड़ी फिर से बाल लेंगे मिट्टी के इस चूल्हे में इश्...
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आज तारों ने फिर कहा, उम्र के महल में अब भी हुस्न के दीये से जल रहे- तू नहीं आया.... किरणों का झुरमुट कह रहा, रातों की गहरी नींद से उज...
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ज़िन्दगी के उन अर्थों के नाम— जो पेड़ों के पत्तों की तरह चुपचाप उगते हैं और झड़ जाते हैं ! सूरज रोज़ ढूंढता है मुँह कहीं नहीं दिखता...

