अमृता प्रीतम अपने सपनों पर बहुत विश्वास करती थी .क्यों कि उनके देखे सपने उन्हें कोई न कोई अर्थ दे जाते थे | उनके सपनो की व्यख्या समय समय पर ज्योतिष आचार्य श्री राज जी ने अमृता से मिलने पर की थी |उनके इन्हों सपनो का लेखा जोखा उनकी किताब सितारों के संकेत में लिखा गया है उन्हीं सपनों में एक सपना का विश्लेष्ण उनकी और साहिर के बारे में भी है जब राज जी ने कहा कि आपने आपके सितारों की भाषा देख कर आपका और साहिर साहब के आत्मिक सम्बन्ध देख कर बता सकता हूँ ..अमृता ने कोई जवाब नहीं दिया पर एक नज्म ककी एक पंक्ति उनके बंद होठों में आ गयी ..मान सुच्चे इश्क दा है ,हुनर दा दावा नहीं ....राज जी ने आगे बताया कि आपका जन्म भी कर्क लगन का है और साहिर साहब का भी जन्म कर्क लग्न का है इस लिए आपके आत्म स्थान का मालिक भी मंगल है और साहिर जी का भी |यही मंगल ही कारण बना आपके और उनके आत्मिक सम्बन्ध का और मंगल ही वह कारण बना जिसने आपके सम्बन्ध को कोई सूरत आख्तियार नहीं करने दी....
अमृता ने पूछा वह किस तरह ..?
तब राज जी ने बताया कि आपके आतम तत्व के पंचम स्थान का स्वामी हो कर वह मंगल आपके लग्न में चला गया और वहां कर्क राशि के कारण वह नीच का मंगल हो गया और साहिर साहब का मंगल नवम स्थान पर जाने से वह परमात्मा स्थान पर गया परन्तु उसने अपने पृथ्वी तत्व के भार से उस परमात्म तत्व की सूक्ष्मता को दबा दिया इसी मंगल ने आपकी आत्मिक शक्ति भी कमजोर कर दी और आपका मिलना न हो पाया ..
अमृता को महसूस हुआ उस वक़्त जैसे उनकी एक नज्म की सतर वर्षों के माथे पर अंकित हो गयी थी ..
उम्र की एक रात थी ,अरमान रह गए जागते
किस्मत को नींद आ गयी ...
उन्होंने राज जी से कुछ नहीं कहा पर महसूस किया कि शायद यही मंगल ही किस्मत कि आँखों में भरी हुई नींद थी ..
उन्होंने सिर्फ सपने देखे और हर सपने की ताबीर सपने में हुई और उसकी बात उनकी नज्मों में ..
एह रात तेरे ख्याल विच गुजर के
मैं हुनें हुने जागी हाँ सते बहिश्त उसार के ..
फिर अमृता ने पूछा उनसे कि एक रहस्य की बात बताइए मैंने तो अपना पूर्व जन्म देख लिया साथ में साहिर का भी ..पर साहिर क्यों नहीं देख पाए यह सब ...
राज जीने कहा साहिर साहब न देख पाते यह सब ..क्यों कि उनके ब्रहस्पति पर न आत्म स्थान की दृष्टि है न परमात्मा स्थान पर ..और दूसरी बात कि आपका राहू पंचम में है ..पंचम स्थान पूर्वजन्म का होता है .यह छाया गृह मनुष्य की यादों को पूर्व जन्म से जोड़ देता है .परन्तु साहिर साहब का राहू चौथे स्थान पर है पंचम के व्यय में ..इस लिए पूर्व जन्म की किसी याद का चमत्कार उनके साथ हो नहीं सकता था ..
बस इस जन्म में आपकी मुलाक़ात का संयोग होना जरुरी था और फिर विरोध होना भी ...
अमृता को याद आया कि साहिर से पहली मुलाकातों के समय में उन्होंने एक नज्म लिखी थी
इंज किसे न बिछड़ डिठा
इंज कोई मिलिया अग्गे
होए संयोग वियोग इक्कठे
हंजुआं ये गल हंजू लग्गे ..............
और अब यह राज जी के कहे शब्द जैसे उस नज्म की व्याख्या कर रहे हैं
वह हैरान होती है कि क्या यह नज्मे इल्हाम होती है ? और लिखने वाले शायर जो इनका अक्षर अक्षर जोड़ते हैं ।इनके अर्थो को ही नहीं जानते ? इन आसुंओं और आंसुओं की मुलाक़ात को उन्होंने आज से आधी सदी पहले लिखा था और अर्थ आज राज जी की बातों से जाना ॥यह सोच कर अमृता के बदन में एक कम्पन सा दौड़ गया जैसे पृथ्वी तत्व अग्नि ,पानी पवन और आकाश सभी तत्व मिल कर कोई दिलासा दे रहे हो ...
कितना सच है न जिन्हें मिलना होता है वह किसी भी तरह मिलते हैं ..ग्रह न जाने कैसी चाल चलते हैं जो संयोग और वियोग बना देते हैं ..जिनसे हर दिल किसी न किसी मीठी याद में या दर्द में डूबा रहता है .कोई नज्म के जरिये आपनी बात कह देता है तो कोई किसी और जरिये पर जिनसे मिलना वह पहले से ही तय है ...अजब है यह सितारों कि चाल भी ..जो समझे वही जाने और वही माने ...
Sunday, July 5, 2009
उम्र की एक रात थी ,अरमान रह गए जागते
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मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
अमृता जी के बारे में जितना लिखा जाए मेरे ख्याल से उतना कम है , जैसा कि मैंने अपने पहले लेख में लिखा था कि मैंने इनके लिखे को जितनी बार पढ़ा है उतनी बार ही उसको नए अंदाज़ और नए तेवर में पाया है .।उनके बारे में जहाँ भी लिखा गया मैंने वह तलाश करके पढ़ा है ।एक बार किसी ने इमरोज़ से पूछा कि आप जानते थे कि अमृता जी साहिर से दिली लगाव रखती हैं और फ़िर साजिद पर भी स्नेह रखती है आपको यह कैसा लगता है ?
इस पर इमरोज़ जोर से हँसे और बोले कि एक बार अमृता ने..(Read Full..)
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
एक मुलाकात
मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी
सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने
क्या ख्याल आया
उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी
मेरे हाथों में थमाई
और हंस कर कुछ दूर हो गया
हैरान थी….
पर उसका चमत्कार ले लिया
पता था कि इस प्रकार की घटना
कभी सदियों में होती है…..
लाखों ख्याल आये
माथे में झिलमिलाये (Read full..)



