Monday, June 23, 2008

अमृता तो हीर है,और फकीर भी

इमरोज़ अमृता को कई नामों से बुलाते थे उस में एक नाम था "बरकते "बरकते यानी बरकत वाली अच्छी किस्मत वाली सम्पन्न भरपूर.... वह कहते हैं कि बरकत तो उसके हाथ में है , उसके लेखन में है ....उसके होने में है ,उसके पूरे वजूद में है ..

अमृता तो हीर है
और फकीर भी
तख्त हजारे उसका धर्म है
और प्यार
उसकी ज़िंदगी
जाति से वह भिक्षु है
और मिजाज़ से
एक अमीर
वह एक हाथ से कमाती है
तो
दूसरे हाथ से बांटती है

इमरोज़ और अमृता के मिजाज़ और पसन्द मिलती जुलती भी है और अलग भी है ! वह दोनों अलग कमरे में रहते थे .अमृता बहुत सवेरे काम करती थी जब इमरोज़ सोये हुए होते थे और इमरोज़ उस वक्त काम करते थे जब अमृता सोयी होती थी .दोनों के जीवन कर्म अलग अलग थे लेकिन स्वभाव एक से थे !न वह पार्टी में जाते थे न घर में इस प्रकार का कोई आयोजन होता था दोनों अपने साथ ही वक्त गुजारना पसंद करते थे, अलग अलग अकेले अपने साथ अमृता अपने लेखन में ,इमरोज़ अपनी पेंटिंग्स में ....दोनों के कमरे के दरवाज़े खुले रहते ताकि एक दूसरे की खुशबु आती रहे लेकिन एक दूसरे के काम में कोई दखल अंदाजी नही ....जब अमृता लिख रही होती तो इमरोज़ चुपचाप उसके कमरे में जा के उनकी मेज पर चाय का कप रख आते !पर जब अमृता के बच्चे कुछ मांगते तो अपना लिखना बीच में छोड़ के वह उनका कहा पूरा करती !


अमृता कवितायें बनाती नही थी वह केवल अपने जज्बात से कविता कागज पर उतार देती एक बार लिखने के बाद न तो उन्हें काटती न कुछ उस में बदलती थी जो जहन में आता वह उसको वैसा ही लिख देती !!
एक बार की बात इमरोज़ जी ने मुझे बताई की वह किसी काम से मुम्बई गए थे ....ख़त आदि का सिलसिला उनके और अमृता के बीच में चलता रहा ..ऐसे ही एक ख़त में अमृता ने उन्हें लिखा
जीती !!

तुम जितनी सब्जी दे के गए थे ,वह ख़त्म हो गई है !जितने फल लेकर दे गए थे वह भी ख़त्म हो गए हैं फिरज खाली पड़ा है ..मेरी ज़िंदगी भी खाली होती हुई सी लग रही है - तुम जितनी साँसे छोड़ गए थे ,वह खत्म हो रहीं है ....

दस्तावेज ;अमृता प्रीतम के ख़त ]

इमरोज़ अमृता से कई साल छोटे थे पर कभी उम्र उनके प्यार में नही आई ,दोनों अलग शख्सियत थे पर एक दूजे को दिल से चाहा !! क्या इस लिए कहते हैं कि विपरीत परस्पर एक दुसरे को आकर्षित करते हैं ? क्या प्यार इन्ही दो उलट लोगो के बीच की कशिश होती है !!

वह

हर कोई कह रहा है
कि वह नही रही
मैं कहता हूँ
वह है
कोई सबूत?
मैं हूँ
अगर वह न होती
तो मैं भी न होता ....

इमरोज़

17 comments:

सुशील कुमार छौक्कर said...

अमृता तो हीर है
और फकीर भी
तख्त हजारे उसका धर्म है

वह एक हाथ से कमाती है
तो
दूसरे हाथ से बांटती है

पढ़क कर अच्छा लगा।

mamta said...

प्यार इसी को कहते है जहाँ कोई शर्त नही कोई नियम नही।

बहुत अच्छा लगा पढ़कर ।

Parul said...

kuch din pehley unki KACHHEY RESHAM JAISI LADKI short stories padhi hai..aapki post ne vapas yaad dila di..

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

अमृता तो हीर है
और फकीर भी

लाजवाब!.. बहुत बहुत शुक्रिया रंजू जी.. मीना कुमारी जी के बाद अमृता जी के बारे में जानना सुखद अनुभूति है..

mehek said...

हर कोई कह रहा है
कि वह नही रही
मैं कहता हूँ
वह है
कोई सबूत?
मैं हूँ
अगर वह न होती
तो मैं भी न होता ....

this is the confidence that someone is their living in heart like a soul,everytime its a different beautiful experience to read,amruta imroz,bahut khub.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

इमरोज़ साहब के लफ्ज़
मोहब्बत की तासीर के
मुक़म्मल बयान हैं.
=============
आपकी प्रस्तुति का
यह सिलसिला अब
हमारी ख़ास पढ़ी गयी
इबारतों का रोज़नामचा
भी बन गया है.
==================
शुभकामनाएँ

pallavi trivedi said...

bada achcha sa lag raha hai amrta ko padhna...sukhad anubhooti.

मीत said...

वाह ! ग़ज़ब.

अल्पना वर्मा said...

aisa lagta hai..in ke baare mein bas padhte rahen...

Udan Tashtari said...

आभार.बेहतरीन.

DR.ANURAG said...

इमरोज भी शायद अमृता के साथ साथ रहकर कुछ शायर बन गये..अलबत्ता उनकी लिखी सारी बातें तो शायद वो दिलचस्प रूप न ले सके.....पर कुछ वाकई दिलचस्प है......

nav pravah said...

शुक्रिया जी,अब तो लगता है एक डाकुमेंटरी बना ही ली जाए आपके सहयोग से.बहुत खूब
आलोक सिंह "साहिल"

shivani said...

amrita ji ke baarey mein jaanna achha lagta hai...ab to har roz intzaar rahta hai inke baarey mein padhne ka....thanx a lot.....

Dr.Bhawna said...

बहुत अच्छा लिखा है आपने... शुभकामनाएँ...

vijaymaudgill said...

इमरोज़ अमृता को कई नामों से बुलाते थे उस में एक नाम था "बरकते "बरकते यानी बरकत वाली अच्छी किस्मत वाली सम्पन्न भरपूर.... वह कहते हैं कि बरकत तो उसके हाथ में थी, उसके लेखन में थी ....उसके होने में थी ,उसके पूरे वजूद में थी ....
pehle to apka aabhar kyonki mere kehne par apne amrita-imroz g k khat padhane shuru kiye kyonki yeh aise khat hain ki inhe insaan jab bhi padhe tab-2 taaza likha lage inme se unke pyar ki khushbu mehsoos hoti hai.
dusri baat apne pehle pehre main har jagaha amrita ko thye(past)likha hai. magar imroz aaj bhi unhe hai(present) mante hain aur likhte hain. iski gavahi unki kavitaye bhi hain. kripya post ko edit kar lain.
bahut acha laga padh kar.

रंजू ranju said...

@vijaymaudgill
जी सही कहा आपने .थी तो वह इमरोज़ के लिए कभी होंगी भी नही...मैंने एडिट कर दिया है ..शुक्रिया जी हाँ आपके कहने पर ही मैंने उनके ख़त यहाँ देने शुरू किए हैं ..सही कहा आपने की इस में आज भी वही प्यार की महक है ..पढ़ते रहे और अपने विचार यूँ ही निसंकोच देते रहे ..क्यूंकि अमृता हम सब की है :)

Kaniz Fatima said...

mohabbat ka doosra naam - Amrita - IMROZ...
jise sirf mahssos kiya ja sakta hai..
shukriya pyaar ki khooshboo ka ehssas karaney aur philaney ke liye...