Friday, December 9, 2011

राजनीति एक क्लासिक फिल्म है

सुना है
राजनीति एक क्लासिक फिल्म है
हीरो: बहुमुखी प्रतिभा का मालिक
रोज अपना नाम बदलता है
हीरोइन: हकूमत की कुर्सी वही रहती है
ऐक्स्ट्रा: लोकसभा और राजसभा के मैम्बर
फाइनेंसर: दिहाड़ी के मज़दूर,
कामगर और खेतिहर
(फाइनांस करते नहीं,
करवाये जाते हैं)
संसद: इनडोर शूटिंग का स्थान
अख़बार: आउटडोर शूटिंग के साधन
यह फिल्म मैंने देखी नहीं
सिर्फ़ सुनी है
क्योंकि सैन्सर का कहना है —
'नॉट फॉर अडल्स।'

5 comments:

सदा said...

बेहतरीन शब्‍द रचना ... प्रस्‍तुति के लिए आपका आभार ।

वन्दना said...

कितना कटु सत्य्।

अभिषेक मिश्र said...

क्या बात है !

प्रेम सरोवर said...

बहुत ही सुंदर भावों का प्रस्फुटन देखने को मिला है । मेरे नए पोस्ट उपेंद्र नाथ अश्क पर आपकी सादर उपस्थिति की जरूरत है । धन्यवाद ।

lokendra singh said...

han yahi hai...