रंग ...
रंगों के साथ
खेलते खेलते
मैं भी रंग हो गया हूँ
कुछ बनने न बनने से
बेपरवाह ,बेफिक्र ...
होली ..
रंग -रंग खेलने के लिए
हम तीन
इकट्ठे हुए थे --
रंग ख्याल और मैं
हमने अपने अपने रंगों से
अपने अपने दोनों हाथ भर लिए
और खेल शुरू हो गया
पहले रंगों ने
अपने जाने पहचाने रंगों से
ख्यालों को रंग लगाया
और फिर
ख्यालों ने अपने अलहदा और नए रंगों से
रंगों को रंग दिया
और फिर
दोनों ने अपने अपने रंगों से
मुझे जी भर के रंगा
मैंने भी दोनों के दोनों हाथो में
इतना रंग रंग दिया
अपने गहरे गहरे रंगों से
कि पहचान न हो पाए
कि रंग कौन से हैं और ख्याल कौन से ..
यह रंगों का खेल
सचमुच में एक खुबसूरत खेल है
यह रंग खेलते खेलते
मेरी अपनी एक पहचान बन गयी है
रंगों के गहरे रंग और
ख्यालों के एक दम अलहदा रंगों से
सना हुआ मैं
पहचान मुक्त हुआ
दोनों को कस कर गले मिल रहा था
बारी बारी से ....
इमरोज़
Thursday, March 5, 2009
इमरोज़ के रंगों और लफ्जों की होली
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मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
मोहब्बत जिस राह से गुजर कर आई है..अमृता प्रीतम
अमृता जी के बारे में जितना लिखा जाए मेरे ख्याल से उतना कम है , जैसा कि मैंने अपने पहले लेख में लिखा था कि मैंने इनके लिखे को जितनी बार पढ़ा है उतनी बार ही उसको नए अंदाज़ और नए तेवर में पाया है .।उनके बारे में जहाँ भी लिखा गया मैंने वह तलाश करके पढ़ा है ।एक बार किसी ने इमरोज़ से पूछा कि आप जानते थे कि अमृता जी साहिर से दिली लगाव रखती हैं और फ़िर साजिद पर भी स्नेह रखती है आपको यह कैसा लगता है ?
इस पर इमरोज़ जोर से हँसे और बोले कि एक बार अमृता ने..(Read Full..)
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
अमृता प्रीतम की कुछ कवितायें Poems by Amrita Pritam
एक मुलाकात
मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी
सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने
क्या ख्याल आया
उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी
मेरे हाथों में थमाई
और हंस कर कुछ दूर हो गया
हैरान थी….
पर उसका चमत्कार ले लिया
पता था कि इस प्रकार की घटना
कभी सदियों में होती है…..
लाखों ख्याल आये
माथे में झिलमिलाये (Read full..)




20 comments:
यह कविता अंदर से रंगती है। अपने गहरे रंगों से यह रूहानी रंग भरती है। उसका कोई एक अर्थ नहीं, उसका कोई एक खयाल नहीं, लेकिन उसकी रूह एक ही है। यह कविता पढ़ते हुए मुझे फ्रेंच पेंटर पॉल क्ली की याद हो आई जो बेहतरीन कलरिस्ट थे और रंगों को अपने भीतर बहता महसूस करते थे। इतनी सुंदर कविता लगाने के लिए किन शब्दों में आभार व्यक्त करूं।
बहुत ही लाजवाब. प्रणाम.
रामराम.
बहुत अच्छी कविता है। वाकई होली के सारे रंग इमरोज साहब की इस कविता में भरे हुए हैं।
रंगों का जादूगर कितनी खूबसूरती, कितने अनूठे अंदाज़ में अटखेलियाँ कर रहा है रंगो के साथ, शब्दों के साथ,
क्या खूब लिखा है रंग, मैं और मेरे ख्वाब. बेहतरीन रचना
rangon jaisi sundar rachana,waah
भावभीने अहसास की कविता ,शुक्रिया !
रंगों से लबालब भरी पोस्ट.....शानदार
वाह ! प्रासंगिक प्रस्तुति
रंगो से रंगी एक बेहतरीन रचना पढवाने के लिए शुक्रिया। लगता है इस बार तो होली मनानी ही पडेगी, चारों तरफ बिखरे रंग आवाज लगा रहे है।
आदरणीय रंजू जी, हमेशा की तरह यह पोस्ट भी लाजवाब।
jashan jaari hai.....
ranjana ji,
imroj ji ne to rangon mein sarabor kar diya.......athah gahrayi hai.........in rangon mein doobna aur milkar ek ho jana..........waah, kya baat hai.
Rango se sarabor prastuti...
रंगों के साथ
खेलते खेलते
मैं भी रंग हो गया हूँ
कुछ बनने न बनने से
बेपरवाह ,बेफिक्र ...shukriya ranju di
बहुत ही लाजवाब .............
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
रंगों ने ख़्यालों को रंगा, फिर ख़्यालों ने रंगों को रंगा और फिर.... उसके बाद दोनों ने मुझे रंग दिया। कैसे रंग, ख़्याल और व्यक्तित्व आपस में एक हो जाते हैं... अदभुत!
बहुत सुंदर रचना... आप सबको होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...
होली पर ये कविता पढ़ कर सच-मुच रंगों में जान पड़ गयी. बहुत सुंदर!
साथ ही परिवार सहित आपको होली की शुभकामनाएं !!!
आपको परिवार सहित होली की बहुत बधाई और घणी रामराम.
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