Wednesday, March 4, 2009

रंग और लफ्जों का खेल

जब अपने पास सिर्फ एक शाम होती थी
हर शाम हम मिलते थे
और छोटी सी इस शाम के मद्धिम हो रहे रंगों में
चुपचाप एक दूसरे को देखते
चलते रहते ..चलते रहते
और अपनी शाम पार कर लेते ...
फिर वक़्त आया
अपनी शाम अपनी उम्र जितनी हो गयी
और अपने आंगन में हर रोज़
सुबह के रंगों में दोपहर के रंग
और दोपहर के रंगों में शाम के रंग
और शाम के रंगों में चांदनी के रंग
मिलते रहे .....
जब भी इन रंगों का दिल आता
ये सब मिल कर
कभी तेरे कमरे में चले जाते
तेरे पास बैठते तेरी कविता के रंग देखते
और कभी तुम्हे देखते
कभी यह मेरे कमरे में आ जाते
मेरे रंगों से तब तक खेलते
जब तक मैं पेंट करता रहता
और फिर आँगन में जा कर
धूप छांव के साथ खेल खेलते दिखते
ये सारे रंग कभी तस्वीर
दिखते और कभी कविता ........

इमरोज़

11 comments:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

ये सारे रंग कभी तस्वीर
दिखते और कभी कविता
इमरोज जी की बढ़िया रचना प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना. शुभकामनाएं.

रामराम.

Prem Farrukhabadi said...

achchghi lagi rachna.badhaai ho

विनीता यशस्वी said...

और फिर आँगन में जा कर
धूप छांव के साथ खेल खेलते दिखते
ये सारे रंग कभी तस्वीर
दिखते और कभी कविता ........

Behtreen kavita...

ओम आर्य said...

achchi lagi ye isk ki painting.

सुशील कुमार छौक्कर said...

ये रचना पहले नही पढी मैंने। इसलिए इसे पढवाने का शुक्रिया।
जब भी इन रंगों का दिल आता
ये सब मिल कर
कभी तेरे कमरे में चले जाते
तेरे पास बैठते तेरी कविता के रंग देखते
और कभी तुम्हे देखते
कभी यह मेरे कमरे में आ जाते
मेरे रंगों से तब तक खेलते
जब तक मैं पेंट करता रहता

सच बेहतरीन लफ़्ज लिये हुए। दिल को भा गई।

मीत said...

Thanks.

कुश said...

शानदार है.. बहुत ही शानदार

vandana said...

bahut hi sundar bhav-------padhvane ke liye shukriya.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत ही अच्छी रचना को प्रस्तुत किया.

दिगम्बर नासवा said...

जब भी इन रंगों का दिल आता
ये सब मिल कर
कभी तेरे कमरे में चले जाते
तेरे पास बैठते तेरी कविता के रंग देखते
और कभी तुम्हे देखते
कभी यह मेरे कमरे में आ जाते
मेरे रंगों से तब तक खेलते
जब तक मैं पेंट करता रहता

इतनी खूबसूरत रचना..........ऐक पेंटर रंगों को कल्पना में बाँध देता है जैसे ऐक कवि ख्वाबों को कल्पना में उड़ाता है.