Thursday, June 24, 2010

अमृता एक नदी ,एक सदी

अमृता तो
वारिस शाह के कुल से जन्मी
कोई लड़की है
बीसवीं सदी में
शब्द सूत कात रही है
कहती है --
मैंने तो डलिया में से
कुछ पूनियां ही काती है
और काते बैठी है
दोनों पंजाब की सारी रुई ....


एक सदी जा रही है
अंतिम पलों में है
एक नदी जा रही है
अंतिम क़दमों में है
समंदर की और बह रही है
समन्दर को पता है
वह और हो जाएगा बड़ा


समन्दर सोचता है
कैसे करूँगा मैं उसका स्वागत
कौन सा होगा उसका प्रवेश द्वार
कौन स होगा उसका स्वागती द्वार
पूरा समन्दर नदी के स्वागत में है
तब नदी हो जाएगी समन्दर
धरती सोचेगी --मैं अब वह नहीं रही
समन्दर धाराओं से कहता है
तुमको बनना है कुरान की आयतें
मुझकों बनना है धर्म ग्रन्थ की देह
इस तरह हम चिंतन यज्ञ रचाएं
हो सकेगा --मेरी बच्ची का स्वागत !!!

17 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति....

वन्दना said...

बहुत ही सुन्दर्।

Mukesh Kumar Sinha said...

adbhut, mere pass shabd nahi hai......amrita jee ka chitran...lajabab!!

nimantran: hamre blog pe aane ka:D

नीरज जाट जी said...

बहुत अच्छी लगी।

वाणी गीत said...

समन्दर धाराओं से कहता है
तुमको बनना है कुरान की आयतें
मुझकों बनना है धर्म ग्रन्थ की देह
इस तरह हम चिंतन यज्ञ रचाएं
हो सकेगा --मेरी बच्ची का स्वागत !!!

सुन्दर !

निर्मला कपिला said...

कहती है --
मैंने तो डलिया में से
कुछ पूनियां ही काती है
और काते बैठी है
दोनों पंजाब की सारी रुई ....
बहुत ही सुन्दर अभिवयक्ति है। पंजाब ही नही शायद पूरी दुनिया की पूनियां कात ली थी उसने। धन्यवाद्

अबयज़ ख़ान said...

सुंदर..सुंदर..सुंदर. ये तो समंदर की खुशकिस्मती है..

sada said...

पूरा समन्दर नदी के स्वागत में है
तब नदी हो जाएगी समन्दर ..... सुन्‍दर शब्‍द रचना, आभार प्रस्‍तुति के लिये

Vidhu said...

एक सदी जा रही है
अंतिम पलों में है
एक नदी जा रही है
अंतिम क़दमों में है
समंदर की और बह रही है
समन्दर को पता है
वह और हो जाएगा बड़ा.....dil ko raahat dene waali

Parul said...

ye 'aah' se 'waah' tak ka safar hai..unka koi sani nahi..!

हरकीरत ' हीर' said...

एक सदी जा रही है
अंतिम पलों में है
एक नदी जा रही है
अंतिम क़दमों में है
समंदर की और बह रही है
समन्दर को पता है
वह और हो जाएगा बड़ा

सच कहा आपने ....अमृता एक सदी ही तो थी ......!!

Anonymous said...

really nice,सुन्दर !
vivj2000.blogspot.com

sajid said...

बहुत सुन्दर प्रस्‍तुति!

indu puri goswami said...

समन्दर धाराओं से कहता है
तुमको बनना है कुरान की आयतें
मुझकों बनना है धर्म ग्रन्थ की देह
इस तरह हम चिंतन यज्ञ रचाएं
हो सकेगा --मेरी बच्ची का स्वागत !!!
इश्क और इश्क करने वाले, जहाँ भी उनके कदम पड़े कुरआन की आयते खुद-ब-खुद लिखा गई.
धर्म-ग्रंथों की देह भी इश्क से ही रची है मालिक ने .
इश्क मारा है ना इश्क की इबादत करने वाले वो जीते हैं हर इश्क करने वालों में.
@ रंजनाजी ' फिर आज इश्क और इश्क करने वाले उन दो दिलों का फ़साना याद आया, जो हकीकत है पर अफसाना लगता है. जाने क्यूँ कर याद आ गया? पता नही.. धन्यवाद.

Indu Puri said...

aaj fir aankhon ke samne se ye kvita gujri aur main thahar gai........ aage bdhu?? kitni baar pdhun ise.....mn nhi bhra is baar bhi

Indu Puri said...

aaj fir aankhon ke samne se ye kvita gujri aur main thahar gai........ aage bdhu?? kitni baar pdhun ise.....mn nhi bhra is baar bhi

Indu Puri said...

aaj fir aankhon ke samne se ye kvita gujri aur main thahar gai........ aage bdhu?? kitni baar pdhun ise.....mn nhi bhra is baar bhi