Thursday, August 30, 2012

..जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक अमृता

वर्ष कोयले की तरह बिखरे हुए
कुछ बुझ गये, कुछ बुझने से रह गये
वक्त का हाथ जब समेटने लगा
पोरों पर छाले पड़ गये….
तेरे इश्क के हाथ से छूट गयी
और जिन्दगी की हन्डिया टूट गयी
          
     तुम मुझे उस जादुओं से भरी वादी में बुला रहे हो जहाँ मेरी उम्र लौटकर नहीं आती। उम्र दिल का साथ नहीं दे रही है। दिल उसी जगह पर ठहर गया है, जहाँ ठहरने का तुमने उसे इशारा किया था। सच, उसके पैर वहाँ रूके हुए हैं। पर आजकल मुझे लगता है, एक-एक दिन में कई-कई बरस बीते जा रहे हैं, और अपनी उम्र के इतने बरसों का बोझ मुझसे सहन नहीं हो रहा है.....अमृता

.......यह मेरा उम्र का ख़त व्यर्थ हो गया। हमारे दिल ने महबूब का जो पता लिखा था, वह हमारी किस्मत से पढ़ा न गया।.......तुम्हारे नये सपनों का महल बनाने के लिए अगर मुझे अपनी जिंदगी खंडहर भी बनानी पड़े तो मुझे एतराज नहीं होगा।......जो चार दिन जिंदगी के दिए हैं, उनमें से दो की जगह तीन आरजू में गुजर गए और बाकी एक दिन सिर्फ इन्तजार में ही न गुजर जाए। अनहोनी को होनी बना लो मिर्जा।..... .अमृता
राम चलाना और बर्मन की आवाज सुनना- सुन मेरे बंधु रे। सुन मेरे मितवा। सुन मेरे साथी रे। और मुझे बताना, वे लोग कैसे होते हैं, जिन्हें कोई इस तरह आवाज देता है। मैं सारी उम्र कल्पना के गीत लिखती रही, पर यह मैं जानती हूँ - मैं वह नहीं हूँ जिसे कोई इस तरह आवाज दे। और मैं यह भी जानती हूँ, मेरी आवाज का कोई जवाब नहीं आएगा। कल एक सपने जैसी तुम्हारी चिट्ठी आई थी। पर मुझे तुम्हारे मन की कॉन्फ्लिक्ट का भी पता है। यूँ तो मैं तुम्हारा अपना चुनाव हूँ, फिर भी मेरी उम्र और मेरे बन्धन तुम्हारा कॉन्फ्लिक्ट हैं। तुम्हारा मुँह देखा, तुम्हारे बोल सुने तो मेरी भटकन खत्म हो गई। पर आज तुम्हारा मुँह इनकारी है, तुम्हारे बोल इनकारी हैं। क्या इस धरती पर मुझे अभी और जीना है जहाँ मेरे लिए तुम्हारे सपनों ने दरवाज़ा भेड़ लिया है। तुम्हारे पैरों की आहट सुनकर मैंने जिंदगी से कहा था- अभी दरवाजा बन्द नहीं करो हयात। रेगिस्तान से किसी के कदमों की आवाज आ रही है। पर आज मुझे तुम्हारे पैरों का आवाज सुनाई नहीं दे रही है। अब जिंदगी को क्या कहूँ? क्या यह कहूँ कि अब सारे दरवाजे बन्द कर ले......। ....अमृता
देख नज़र वाले, तेरे सामने बैठी हूँ
मेरे हाथ से हिज्र का काँटा निकाल दे

जिसने अँधेरे के अलावा कभी कुछ नहीं बुना
वह मुहब्बत आज किरणें बुनकर दे गयी

उठो, अपने घड़े से पानी का एक कटोरा दो
राह के हादसे मैं इस पानी से धो लूंगी...

रास्ते कठिन हैं। तुम्हें भी जिस रास्ते पर मिला, सारे का सारा कठिन है, पर यही मेरा रास्ता है।.....मुझ पर और भरोसा करो, मेरे अपनत्व पर पूरा एतबार करो। जीने की हद तक तुम्हारा, तुम्हारे जीवन का जामिन, तुम्हारा जीती।....ये अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य का पल्ला तुम्हारे आगे फैलाता हूँ, इसमें अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को डाल दो।.....इमरोज़

मेरी सारी ज़िन्दगी मुझे ऐसी लगती है जैसे
मैंने तुम्हे एक ख़त लिखा हो। मेरे दिल की हर धड़कन एक अक्षर है, मेरी हर साँस जैसे
कोई मात्रा, हर दिन जैसे कोई वाक्य और सारी ज़िन्दगी जैसे एक ख़त। अगर कभी यह ख़त
तुम्हारे पास पहुँच जाता, मुझे किसी भी भाषा के शब्दों की मोहताजी न होती।

..... अमृता प्रीतम



आज ३१ अगस्त है ...अमृता जन्मदिन तुम्हे मुबारक ....हर जन्मदिन पर लगता है क्या लिखूं तुम्हारे लिए ...सब कुछ कह के भी अनकहा है वक़्त बीत रहा है ...तलाश जारी है खुद में तुमको पाने की ..तुम जो .मेरे प्रेरणा रही ..मेरी आत्मा में बसी मुझे हमेशा लगा जैसे जो प्यास .जो रोमांस ,जो इश्क की कशिश तुम में थी वह तुमसे  कहीं कहीं बूंद बूंद मुझ में लगातार रिस रही है ...इमरोज़ भी एक ही है और अमृता भी एक थी ..पर ..फिर भी अमृता तुम्हारे लिखे ..को पढ़ के ...अमृता तुम्हारी तरह जीने की आस टूटती नहीं ..जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक  अमृता

7 comments:

शारदा अरोरा said...

bahut samvedan sheel hai...
राम चलाना और बर्मन की आवाज सुनना- सुन मेरे बंधु रे। सुन मेरे मितवा। सुन मेरे साथी रे। और मुझे बताना, वे लोग कैसे होते हैं, जिन्हें कोई इस तरह आवाज देता है।ufff...

दीपिका रानी said...

अमृता जी को समर्पित आपके इस ब्लॉग पर उन्हें जन्मदिन मुबारक...

सदा said...

मन को छूती हुई यह प्रस्‍तुति ... आपकी कलम से अमृता जी को पढ़ना हमेशा ही अच्‍छा लगता है ... शुभकामनाएं

Anand Dwivedi said...

अमृता जी को जब पढ़ना शुरू किया था ...तब भी इस ब्लॉग से मुझे बहुत मदद मिली थी आपका आभार रंजना जी !
समझ नहीं आता कि श्रद्दांजलि दूं या बधाई ..श्रद्दांजलि इस लिए नहीं दे सकता कि इमरोज़ क्या सोंचेंगे
इस लिए बधाई !


Krishna Kumar Mishra said...

sundar prayaas Ranjana ji

Mukesh Kumar Sinha said...

dil ko chhutti hui...

डॉ. जेन्नी शबनम said...

आज इमरोज़ जी के जन्मदिन पर अमृता जी के जन्मदिन का पोस्ट पढी. अजब संयोग होता है कभी कभी...